15th Finance Commission Explained: हेल्थ स्कीम की पूरी जानकारी हिंदी में
15TH FINANCE COMMISSION (2021–2026)
भारत की शहरी आबादी की तेजी से वृद्धि को देखते हुए, सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 15वें वित्त आयोग (FC-XV) की सिफारिशों पर शहरी क्षेत्रों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य योजना लागू की गई है, जो 2021-22 से 2025-26 तक चलेगी। भारतीय शहरी क्षेत्रों में सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना सरकार का पांच वर्षीय लक्ष्य है।
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| 15वें वित्त आयोग की शहरी स्वास्थ्य योजना – 2021 से 2026 तक |
योजना में क्या-क्या शामिल है?
इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों के लिए दो मुख्य घटकों पर काम किया जा रहा है:
1. अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (Urban HWCs) :
अब शहरों में छोटे-छोटे मोहल्लों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का प्रबंध किया गया है। इसके लिए एक "हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर" बनाया जा रहा है, जहां आम बीमारियों से लेकर जांच, इलाज और सलाह सब कुछ एक जगह मिल सकेगा। खास बात ये है कि इन सेंटरों में स्थानीय लोगों और निवासियों के कल्याण संघों का भी उपयोग होगा, जिससे स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी।
इन सेंटरों को चलाने में हर साल 70 लाख रुपये खर्च होंगे। साथ ही, जहां आवश्यकता होगी, "पॉलीक्लिनिक सेवाएं" भी शुरू की जाएंगी, जिस पर सालाना ₹5 लाख का अतिरिक्त खर्च होगा।
2. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (UPHCs) में डायग्नोस्टिक सेवाएं
शहरों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच सुविधाओं को बेहतर बनाना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए आयोग ने ₹2,095 करोड़ खर्च किए हैं। अब हर UPHC में ब्लड टेस्ट, एक्स-रे और शुगर टेस्ट जैसे आवश्यक डायग्नोस्टिक टेस्ट किए जा सकेंगे। झुग्गी और गरीब इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी। औसतन, एक सेंटर को पूरी तरह जांच सुविधाओं से लैस करने में ₹25.86 लाख खर्च होगा।>
राज्य सरकारों को सलाह दी गई है कि वे Hub and Spoke मॉडल अपनाएं. इसका अर्थ है कि कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर बड़े जांच केंद्र बनाए जाएं और अन्य केंद्रों को उनसे जोड़ें।
योजना का कार्यकाल: 2021 से 2026
इस पूरे कार्यक्रम को वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पाँच वर्षों के लिए लागू किया गया है। इस दौरान हर साल बजट जारी किया जाएगा और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों और जांच सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। ताकि कोई क्षेत्र पीछे न छूटे, हर वर्ष राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
क्रियान्वयन में कौन-कौन शामिल है?
इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए विभिन्न स्तरों पर समितियाँ बनाई गई हैं:
- शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) – योजनाओं का ज़मीनी क्रियान्वयन
- जिला स्तरीय समिति (DLC) – मार्गदर्शन और निगरानी
- राज्य स्तरीय समिति (SLC) – बजट आवंटन, पुनःआवंटन और अनुमोदन
- राष्ट्रीय समिति (NC) – नीति निर्धारण और उच्च-स्तरीय मार्गदर्शन
फंड कैसे मिलेगा?
फंडिंग पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेही वाली प्रक्रिया है। केंद्रीय सरकार राज्यों को जून और अक्टूबर में दो बार अनुदान देती है। राज्य सरकारें 10 दिनों के भीतर इस रकम को संबंधित ULBs को देती हैं। PFMS प्रणाली सभी लेन-देन को नियंत्रित करती है, जिससे धन का ट्रैक और ऑडिट आसानी से हो सके।
चुनौतियाँ और समाधान
हर नगर निगम और नगरपालिका के पास क्षमता और संसाधन हैं। तकनीकी कर्मचारियों और उपकरणों की कई जगहों पर कमी हो सकती है। इसलिए योजना में लचीलापन रखा गया है— जैसे, राज्य स्तर पर बड़े टेंडर करके दवा और उपकरण खरीद सकते हैं, और स्थानीय निकायों को केवल संचालन करना होगा। धीरे-धीरे इन निकायों की क्षमता भी बढ़ाई गई है।
निष्कर्ष
15वें वित्त आयोग की यह परियोजना भारत की शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था को पुनर्जीवित करेगी। यदि यह नियमित रूप से और निष्ठापूर्वक लागू किया गया, तो यह बीमारियों को समय रहते रोक सकेगा और करोड़ों लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने से बच सकेगा। यह "स्वस्थ शहरी भारत" की ओर एक ऐतिहासिक कदम है।
आपकी राय क्या है?
क्या आपके शहर में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की सुविधाएं उपलब्ध हैं? क्या आपको इससे कोई अनुभव है? नीचे कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें। साथ ही, इस महत्वपूर्ण सूचना को अपने दोस्तों, परिवार और सोशल मीडिया पर अवश्य साझा करें - जागरूकता ही असली इलाज है।
Disclaimer (संक्षिप्त हिंदी में):
इस पोस्ट में दी गई जानकारी विभिन्न सरकारी दस्तावेजों और मार्गदर्शिकाओं पर आधारित है। कृपया अंतिम निर्णय से पहले संबंधित आधिकारिक स्रोत या विभाग से पुष्टि अवश्य करें।

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