राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम का फंड सैलरी में खर्च, NHM ने जताई आपत्ति
देशभर में चल रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों (NHM) को लेकर एक बड़ी और गंभीर बात सामने आई है। केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिलने वाले फंड का उपयोग बड़ी संख्या में राज्यों द्वारा कर्मचारियों की सैलरी देने में किया जा रहा है, जो तय नियमों के खिलाफ है।
केंद्र सरकार ने इस पर नाराजगी जताते हुए सभी राज्यों को पत्र भेजा है और तुरंत सुधार के संकेत दिए हैं।
![]() |
| NHM ने जताई नाराज़गी फंड सैलरी में खर्च |
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार राज्यों को मानसिक स्वास्थ्य, टीबी नियंत्रण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, पोषण और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के लिए फंड देती है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य है,
- स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना
- अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना
- आम लोगों तक बेहतर इलाज पहुंचाना
लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्यों में इस फंड का 50% से भी अधिक हिस्सा कर्मचारियों की सैलरी और मानव संसाधन पर खर्च किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार यह सीमा लगभग 70% से अधिक नहीं होनी चाहिए और वह भी जरूरत के अनुसार।
केंद्र सरकार ने क्यों जताई आपत्ति?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि—
- योजनाओं के लिए मिलने वाला पैसा अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन में ज्यादा खर्च हो रहा है
- इससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है
- कई जगहों पर कार्यक्रम सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं
केंद्र का मानना है कि फंड का प्राथमिक उपयोग सेवाओं, उपकरणों, दवाइयों और बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे पर होना चाहिए, न कि केवल सैलरी भुगतान पर।
हर कार्यक्रम के लिए काउंसलर की व्यवस्था
केंद्र सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि—
- हर स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए अलग-अलग काउंसलर नियुक्त किए जाएं
- एक ही कर्मचारी पर कई योजनाओं का बोझ न डाला जाए
- जिला से लेकर राज्य स्तर तक स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए
इससे योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और काम की गुणवत्ता भी सुधरेगी।
राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश
केंद्र ने राज्यों से कहा है कि—
- मानव संसाधन की समीक्षा करें
- गैर-जरूरी पदों और खर्चों में कटौती करें
- योजनाओं को आपस में जोड़कर एकीकृत ढांचा तैयार करें
- जरूरत के अनुसार ही कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए
यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में फंड जारी करने पर भी असर पड़ सकता है।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
अगर फंड का सही इस्तेमाल नहीं हुआ, तो—
- अस्पतालों में सुविधाएं प्रभावित होंगी
- दवाइयों और उपकरणों की कमी हो सकती है
- ग्रामीण और गरीब इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर पड़ेंगी
इसी वजह से केंद्र सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन देश की करोड़ों आबादी से जुड़ा हुआ कार्यक्रम है। इसका पैसा अगर सही जगह और सही उद्देश्य के लिए खर्च नहीं होगा, तो सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को होगा। केंद्र सरकार की सख्ती इसी दिशा में एक जरूरी कदम मानी जा रही है।
अब देखना यह होगा कि राज्य सरकारें इन निर्देशों पर कितना अमल करती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं में कितना सुधार देखने को मिलता है।
Disclaimer
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिखा गया है। किसी भी आधिकारिक निर्णय या बदलाव के लिए संबंधित विभाग की अधिसूचना अवश्य देखें।

Post a Comment