राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): PIP 2026-27 गाइडलाइन्स का संपूर्ण विश्लेषण हिंदी में

 नमस्ते दोस्तों,

आज हम एक ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ पर गहराई से नज़र डाल रहे हैं जो भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को बदलने की क्षमता रखता है: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का PIP गाइडेंस नोट 2026-27
यह महज़ एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि एक व्यापक रोडमैप है कि कैसे भारत सरकार और राज्य मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देश के कोने-कोने तक पहुँचें। इस साल की गाइडलाइन्स में कई बड़े और प्रगतिशील बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य योजना को और अधिक कारगर, पारदर्शी और ज़मीनी हकीकत के करीब लाना है।
NHM PIP Guidance Note FY2026-27

2026-27 का मुख्य फोकस: परिणाम और जवाबदेही

इस वर्ष की PIP का मुख्य जोर परिणाम-आधारित योजना (Outcome-Based Planning) पर है। अब ध्यान सिर्फ इस बात पर नहीं है कि कितना पैसा खर्च हुआ, बल्कि इस बात पर है कि उस खर्च से वास्तविक स्वास्थ्य परिणाम कितने बेहतर हुए।

प्रमुख सुधार और बदलाव

1. एक वर्ष का PIP चक्र: तेज़ और फुर्तीली योजना

एक बड़ा बदलाव बहु-वर्षीय से एक-वर्षीय PIP चक्र में परिवर्तन है (p. 3)। यह राज्यों को वार्षिक बजट चक्रों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने, तेजी से बदलती स्वास्थ्य प्राथमिकताओं (जैसे बीमारी के प्रकोप) पर तुरंत प्रतिक्रिया देने और हर साल जवाबदेही सुनिश्चित करने की सुविधा देता है (p. 3)।

2. ज़मीनी स्तर से योजना (Bottom-Up Planning)

अब योजना की प्रक्रिया सुविधा स्तर से शुरू होगी, जिसमें एएनएम, आशा और चिकित्सा अधिकारी सक्रिय रूप से भाग लेंगे (p. 3)। ज़िला स्वास्थ्य कार्य योजनाएँ (DHAPs) ज़मीनी हकीकतों और सामुदायिक ज़रूरतों को दर्शाएँगी, और स्थानीय प्रतिनिधियों (सांसदों, विधायकों, आदि) से भी परामर्श लिया जाएगा (p. 4)।

3. सरलीकृत बजट प्रारूप

प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए बजट प्रारूपों को सरल बनाया गया है (p. 6)।

  • नए बजट हेड: क्षमता निर्माण, आशा प्रोत्साहन, आईटी हस्तक्षेप, और पीएम-केयर्स के तहत वित्तपोषित PSA संयंत्रों के वार्षिक रखरखाव के लिए नए विशिष्ट बजट हेड (Sl. Nos. 201 से 206) जोड़े गए हैं (p. 6)।

  • एकजुट संसाधन पूल: विभिन्न कार्यक्रम प्रमुखों में बजट वितरित करने के बजाय, धन को समेकित संसाधन पूल में मिला दिया गया है, जिससे बेहतर आवंटन संभव होगा (pp. 3, 5)।

4. प्रमुख डिलिवरेबल्स (KDs) का युक्तिकरण

योजना को अधिक केंद्रित करने के लिए, कुल प्रमुख डिलिवरेबल्स की संख्या 186 से घटाकर 65 कर दी गई है (p. 9)। इन KDs को वित्तीय निगरानी रिपोर्ट (FMR) कोड के साथ मैप किया गया है, ताकि खर्च और प्रदर्शन के बीच के अंतर को आसानी से पहचाना जा सके (pp. 8-9)।

5. शर्त ढाँचा (Conditionality Framework): प्रोत्साहन और जवाबदेही

राज्यों में स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए एक शर्त ढाँचा लागू किया गया है (p. 9)। 12 संकेतकों के आधार पर प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा, जिसमें पूर्ण टीकाकरण कवरेज, टीबी मुक्त भारत अभियान का कार्यान्वयन, और राज्य स्वास्थ्य बजट में वृद्धि शामिल है (pp. 9-10)।

मुख्य प्रोग्रामेटिक प्राथमिकताएँ 2026-27

गाइडलाइन्स कई विशिष्ट क्षेत्रों पर भी प्रकाश डालती हैं:

  • मातृ और बाल स्वास्थ्य: 11 उच्च फोकस वाले राज्यों में विशेष प्रसवपूर्व देखभाल पैकेज और मातृ-नवजात देखभाल इकाइयाँ (MNCUs) स्थापित करने पर जोर है (p. 10)।

  • टीकाकरण: एचपीवी वैक्सीन की शुरुआत के लिए माइक्रो-प्लानिंग और आशा प्रशिक्षण की योजना है (p. 11)।

  • रोग नियंत्रण: टीबी की घटनाओं और मृत्यु दर को कम करने के लिए पोषण हस्तक्षेप और व्यापक केस ट्रैकिंग पर ध्यान केंद्रित किया गया है (p. 11)।

  • गैर-संचारी रोग: डे केयर कैंसर सेंटर (DCCCs) की स्थापना एक नई पहल है, साथ ही डायलसिस कवरेज का विस्तार भी किया जा रहा है (pp. 12-13)।

  • मानसिक स्वास्थ्य: टेली-मानस सेवाओं का विस्तार और सामुदायिक आउटरीच के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाना प्राथमिकता है (p. 12)।

डिजिटलीकरण और एकीकरण

कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए डिजिटल पहल महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रीय एग्रीगेटर प्लेटफ़ॉर्म विभिन्न कार्यक्रम पोर्टलों (जैसे NCD, Nikshay, U-WIN) को एकीकृत करेगा, जिससे स्वास्थ्य कार्यकर्ता के लिए डेटा प्रविष्टि आसान हो जाएगी (p. 15)।

Disclaimer

यह लेख सरकारी PIP Guidance Note 2026-27 पर आधारित जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अंतिम निर्णय संबंधित राज्य और केंद्र सरकार की नीति पर निर्भर करेगा।


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